गले लगने की ख्वाईश
करे जो दिलो जान से पूरी
उन्हें दूर करने की कोशिश
मैखाने की शान नहीं साकी
खो ने दे इनकें बाहों में
बची यही इक मध् होशी
पथरीली ठंडक ही सही
अन्दर की चिंगारी बुझे,शायद, साकी.
कायर कहो, लाचार कहो
नाम जितने भी दो बदनाम साकी
उनकी आख़री निशाँ के शान से
मुह मोड़ ले, इतनी बेवफा हम नहीं.
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